Saturday, July 4, 2026

गोमुखीलक्षणम्........

 



#गोमुखीलक्षणम्.........💖


सनातन परम्परा में प्रयुक्त सभी वस्तु आदि के शास्त्रीय स्वरूप निर्धारित हैं सभी सम्प्रदायों में जप का विधान है । जपार्थ माला को गोमुखी के अन्दर रखना अनिवार्य है। शान्त्यर्थ जप के समय गोमुखी से तर्जनी को बाहर करके मणिबन्धपर्यन्त हाथ को अन्दर रखने का विधान है....... 


प्रकृति में #गोमुखी के शास्त्रीय लक्षण पर विचार किया जाता है । 

  #गोमुखी_माने_गौ_के_मुख_जैसा_वस्त्र ।  


   "#वस्त्रेणाच्छाद्य_च_करं_दक्षिणं_य:#सदा_जपेत् । 

    #तस्य_स्यात्सफलं_जाप्यं_तद्धीनमफलंस्मृतम् ।। 

   #अत_एव_जपार्थं_सा_गोमुखी_ध्रियते_जनै: ।।                 

               (आ.सू.वृद्धमनु) 

 गोमुखी से अतिरिक्त आधुनिक झोली में मणिबन्धपर्यन्त दायें हाथ को ढऀकना सम्भव नहीं है.......


 #गोमुखादौ_ततो_मालां_गोपयेन्मातृजारवत्  ।

 #कौशेयं_रक्तवर्णं_च_पीतवस्त्रं_सुरेश्वरि ।। 

 #अथ_कार्पासवस्त्रेण_यन्त्रतो_गोपयेत्सुधी: । 

 #वाससाऽऽच्छादयेन्मालां_सर्वमन्त्रे_महेश्वरि ।।

  #न_कुर्यात्कृष्णवर्णं_तु_न_कुर्याद्बहुवर्णकम् ।

  #न_कुर्याद्रोमजं_वस्त्रमुक्तवस्त्रेण_गोपयेत्।।                                                                 

                 (#कृत्यसारसमुच्चय)

सूती वस्त्र का गोमुखादि कौशेय, रक्त अथवा पीत वर्ण का हो । काला, हरा, नीला, बहुरङ्गी या रोमज न हो .......

        पुन: इसके विशेष मान भी हैं......

 #चतुर्विंशाङ्गुलमितं_पट्टवस्त्रादिसम्भवम् । 

  #निर्मायाष्टाङ्गुलिमुखं_ग्रीवायां_षड्दशाङ्गुलम् । 

   #ज्ञेयं_गोमुखयन्त्रञ्च_सर्वतन्त्रेषु_गोपितम् । 

   #तन्मुखे_स्थापयेन्मालां_ग्रीवामध्यगते_करे । 

   #प्रजपेद्विधिना_गुह्यं_वर्णमालाधिकं_प्रिये ।

   निधाय गोमुखे मालां गोपयेन्मातृजारवत् ।।

                                                                    (#मुण्डमालातन्त्र)

         २४ #अङ्गुल परिमित #पट्टवस्त्रादि से निर्माण करे, जिसमें ८ अङ्गुल का मुख और १६ अङ्गुल की ग्रीवा हो । #गोमुखवस्त्र के मुख से माला को प्रवेश कराये और ग्रीवा के अभ्यन्तर में हाथ को रखकर गोपनीयता से यथाविधि जप करे 

 इसी प्रकार के अनेक आगमप्रमाण हैं । आधुनिक झोली की शास्त्रीयता उपलब्ध नहीं होती है प्रचुरमात्रामें कुछ गो विरोधियों ने किसी भारतीय पन्थविशेष में प्रवेश कर अतिशय भक्ति का अभिनय दिखाकर पवित्र #गोमुखी  के बदले अवैध #झोली का दुष्प्रचार कर दिया और दुर्भाग्य से यहाऀ के बड़े-बड़े धर्मोपदेशकों ने भी चित्र-विचित्र उस अशास्त्रीय वस्त्र को स्वीकार कर लिया। 

  शास्त्र का नाम लेकर चलनेवाले महाशय यदि गोमुखी के बदले आधुनिक झोली ही रखना चाहते हैं तो वे अवश्य ही इस #झोली की #शास्त्रीयता #प्रदर्शित #करें। किमधिकम्.....?


                          🙇#जयश्रीसीताराम 🙇

No comments:

Post a Comment