Saturday, March 28, 2026

रावण की सोने की लंका किसने जलायी थी ?

 पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने एक बार भगवान शिवसे कहा - प्रभो !यहां हमारे लिए रहनेके लिए घर तो नहीं हे मगर स्नान करनेके लिए एक कुटीयां भी नहीं हे। में स्नान करने जाऊं और कोई आ जाय तो क्या करू ? कम से कम एक मकान तो बनवा दीजिए। भगवान शिवने माता पार्वती के कहनेपर एक सोनेका महल कैलाश पर्वत पर बनवाया था। भगवान शिवने विश्वकर्माको बुलाकर उसके द्वारा निर्माण करवाया था बादमें भगवान शिवने प्रसन्न होकर उस महल श्री कुबेर (इडविडा पुत्र) को भेट दे दिया था और रावण ने  वह महल छल से कुबेर से छीन लिया था।जब माता पार्वतीको पता चला कि रावणने लंका छीन ली उसी समय उनको गुस्सा आया और उसने कहा की तेरी ये लंका तो में एक दिन जलाकर राख कर दूंगी। 


भगवान शिव ने त्रेतायुग में भगवान विष्णु के राम अवतार की सेवा करनेके लिए वानर रूप में हनुमान जी का अवतार लेने का विचार लिया। उस समय भगवान शिव मृत्यु लोक में आनेकी तैयारी कर रहे थे तब माता पार्वती ने पूछा - प्रभो ! कहा जा थे हो। शिवजीने बताया कि में भगवान रामकी सेवा करनेके लिए एक अवतार धारण करके पृथ्वी पर जा रहा हु। माताने कहा - में भी आपकी अर्द्धांगिनी बनकर आऊंगी। प्रभुने कहा मगर इस अवतारमें में ब्रह्मचारी रहूंगा अतः आप आ नहीं सकती। पार्वतिने कहा ठीक हे तो में आपकी पुंछ पर सवार होकर साथ रहूंगी।


भगवान शिव इस तरह रामकी सेवा करनेके लिए अंजनी पुत्र के रूप में अवतरित हुए और माता पार्वती उनकी पूंछ बन गई।


रावणने कुबेर से  लंका छीन ली तब से माता पार्वतिको रावणके प्रति द्वेष हो गया था। एक बार रावणने माता पार्वतिका हरण करने का प्लान बनाया। वह कैलाश पर्वत पर्वत पर गया और माता को उठा के ले जा रहा था। उस समय नारदजी सामने आ गए। उसनेबपूछा अरे रावण ये क्या बोझ उठाके ले जा रहा हे ? रावणने कहा में पार्वतिको उठाकर लंका ले जा रहा हु। नारदजी बोले अरे किसने कहा कि ये पार्वती हे। रावण बोला में खुद कैलाश से ले आया हु। नारदजीने समझाया अरे ये पार्वती नहीं हे ये तो होगी कोई उसकी दासी।

पार्वती के शरीर से तो कितनी मीठी सुगंध आती रहती हे। देख क्या उसके शरीरसे सुगंध आती हे ? बराबर उस समय माता पार्वती ने अपने शरीर से दुर्गंध फैलाना शुरू कर दिया। रावण बोला इसके शरीर से तो दुर्गंध आती हे। तब नारदजी बोले ये ही तो में कह रहा हु कि ये पार्वती नहीं हो सकती। रावणने उसको वही छोड़ दिया और माता वापस कैलाश पहुंच गई।


हनुमानजीने अपनी पुंछ से लंका जलाई थी मगर उस समय माता पार्वती ही अग्नि रूप धारण किये बैठी थी और उसने ही लंका जलाकर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।

No comments:

Post a Comment