असावरी देवी कौन हे ?
क्या आपको पता हे की भगवान शिवकी एक बहन भी थी ?
पौराणिक कथाओं के अनुसार
असावरी भगवान शिव की बहन थी, जिनका सृजन माता पार्वती की इच्छा पर हुआ था। कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वतीजी ने नंनद होनेकी इच्छा जताई, जिसके बाद शिव ने अपनी माया से असावरी देवी को बनाया। वे अपने भयानक रूप और अत्यधिक भोजन करने की आदत के कारण जानी जाती हैं।
माता पार्वती के अनुरोध पर भगवान शिव ने अपनी शक्ति से असावरी देवी को ननंद के रूप में प्रकट किया था। कथाके अनुसार, माता पार्वती और असावरी देवी के बीच के अनुभवों को ननंद-भाभी के सांसारिक रिश्तों के एक प्रारंभिक उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
उनकी एक विशेष आदत थी की उनको भूख बहुत लगती थी और उसको पेट भरनेके लिए बहुत अन्न की जरूरत पड़ती थी। इस व्यवहार के कारण अंततः उन्हें एक अलग स्थान दिया गया।
कहा जाता है कि असावरी देवी को बहुत अधिक भूख लगती थी। एक बार उनके अत्यधिक खाने के कारण कैलाश का सारा भोजन समाप्त हो गया और उन्होंने देवी पार्वती के साथ मजाक करते हुए अपने विशाल पैरों के बीच दरारों में उन्हें छिपा लिया। इस शरारत से आहत होकर देवी पार्वती ने उन्हें कैलाश से विदा कर दिया। इस प्रसंग के माध्यम से पुराणों और लोक-कथाओं में ननद-भाभी के रिश्ते की शुरुआत और उनसे जुड़े खट्टे-मीठे संबंधों की व्याख्या की जाती है।
असावरी देवी को कई समुदायों में श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। राजस्थान के अलवर जिले के पास राजोरगढ़ गांवमें असावरी माता का एक प्राचीन मंदिर है। कई परिवार इनको अपनी कुलदेवी मानकर पूजते है और भक्त इन्हें शक्ति के एक स्वरूप के रूप में मानते हैं।
। उमापति महादेव की जय ।
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