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*🔱ॐ दुं दुर्गायै नमः।।🔱*
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*✨रुद्राक्ष के एक-मुख आदि के नाम और उनका फल-:✨*
🪷श्लोक के पश्चात हिन्दी अनुवाद किया हुआ है।🪷
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*एकवक्त्रः शिवः साक्षाद् ब्रह्महत्यां व्यपोहति।*
*अवध्यत्वं प्रतिस्त्रोतो वह्निस्तम्भं करोति च।।*
*द्विवक्त्रो हरगौरी स्याद् गोवधाद्यघनाशकृत्।*
*त्रिवक्त्रो ह्यग्निजन्माथ पापराशिं प्रणाशयेत्।।*
*चतुर्वक्त्रः स्वयं ब्रह्मा नरहत्यां व्यपोहति।*
*पञ्चवक्त्रस्तु कालाग्निरगम्याभक्ष्यपापनुत्।।*
*षड्वक्त्रस्तु गुहो ज्ञेयो भ्रुणहत्यादि नाशयेत्।*
*सप्तवक्त्रस्त्वनन्तः स्यात् स्वर्णस्येयादिपापह्रत्।।*
*विनाययकोऽष्टवक्त्रः स्यात् सर्वानृतविनाशकृत्।*
*भैरवो नववक्त्रस्तु शिवसायुज्यकारकः।*
*दशवक्त्रः स्मृतो विष्णुर्भूतप्रेतभयापहः।*
*एकादशमुखो रुद्रो नानायज्ञफलप्रदः।*
*द्वादशास्यस्तथादित्यः सर्वरोगनिबर्हणः।।*
*त्रयोदशमुखः कामः सर्वकामफलप्रदः।*
*चतुर्दशास्यः श्रीकण्ठो वंशोद्धारकरः परः।।*
(शिवरहस्य)
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*एक मुखवाला रुद्राक्ष साक्षात् 'शिव' है, जो ब्रह्महत्या को दूर करता है और समस्त स्त्रोतोंको अवध्य तथा अग्नि को रोकता है। दो मुखवाला रुद्राक्ष 'हरगौरी' (शिव-पार्वती) है, जो गोहत्या आदि पापों को दूर करता है। तीन मुखवाला रुद्राक्ष 'अग्निजन्मा' है, जो पाप-समूहों को दूर करता है। चार मुखवाला रुद्राक्ष 'ब्रह्मा' है, जो मनुष्यकी हत्या के पाप को नष्ट करता है। पाँच मुखवाला रुद्राक्ष 'कालाग्नि' है, जो अगम्य स्त्रीके साथ गमन तथा अभोज्य के भोजन करने के पाप को नष्ट करता है। छः मुखवाला रुद्राक्ष 'गुह' है, जो भ्रुण-हत्या के पाप को नष्ट करता है। सात मुखवाला रुद्राक्ष 'अनन्त' है, जो सुवर्ण की चोरी के पाप को नष्ट करता है। आठ मुखवाला रुद्राक्ष 'विनायक' है, जो समस्त प्रकार के असत्यों का नाश करता है। नौ मुखवाला रुद्राक्ष 'भैरव' है, जो शिवसायुज्य (मोक्ष) को देता है। दश मुखवाला रुद्राक्ष 'विष्णु' है, जो भूत एवं प्रेत के भय को हरण करता है। ग्यारह मुखवाला रुद्राक्ष 'रुद्र' है, जो अनेक प्रकार के यज्ञों के फल को देता है। बारह मुखवाला रुद्राक्ष 'आदित्य' है, जो समस्त प्रकार के रोगों को दूर करता है। तेरह मुखवाला रुद्राक्ष 'काम' है, जो समस्त कर्मो में सफलता देता है और चौदह मुखवाला रुद्राक्ष 'श्रीकण्ठ' है , जो वंश का उद्धार करता है।*
-- शास्त्री धवलकुमार दवे
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