Saturday, September 5, 2026

जयंती" और "जन्माष्टमी" में अंतर एवं उपाय

 *“जयंती" और "जन्माष्टमी" में अंतर एवं उपाय*

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जयन्ती का अर्थ क्या होता है?

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जयं पुण्यं च कुरुते जयन्तीमिति तां विदुः ।

स्कन्दमहापुराण,तिथ्यादितत्त्व,


जो जय और पुण्य प्रदान करे उसे जयन्ती कहते हैं। कृष्णजन्माष्टमी से भारत का प्रत्येक प्राणी परिचित है। इसे कृष्णजन्मोत्सव भी कहते हैं। किन्तु जब यही अष्टमी अर्धरात्रि में पहले या बाद में रोहिणी नक्षत्र से युक्त हो जाती है तब इसकी संज्ञा “कृष्णजयन्ती” हो जाती है।


रोहिणीसहिता कृष्णा मासे च श्रावणेSष्टमी ।

अर्द्धरात्रादधश्चोर्ध्वं कलयापि यदा भवेत् ।

जयन्ती नाम सा प्रोक्ता सर्वपापप्रणाशिनी ।।


और इस जयन्ती व्रत का महत्त्व कृष्णजन्माष्टमी अर्थात् रोहिणीरहित कृष्णजन्माष्टमी से अधिक शास्त्रसिद्ध है। इससे यह सिद्ध हो गया कि जयन्ती जन्मोत्सव ही है।


अन्तर इतना है कि योगविशेष में जन्मोत्सव की संज्ञा जयन्ती हो जाती है । यदि रोहिणी का योग न हो तो जन्माष्टमी की संज्ञा जयन्ती नहीं हो सकती


चन्द्रोदयेSष्टमी पूर्वा न रोहिणी भवेद् यदि ।

तदा जन्माष्टमी सा च न जयन्तीति कथ्यते ॥–नारदीयसंहिता


कहीं भी किसी मृत व्यक्ति के मरणोपरान्त उसकी जयन्ती नहीं अपितु पुण्यतिथि मनायी जाती है।


भगवान् की लीला का संवरण होता है मृत्यु या जन्म सामान्य प्राणी का होता है। भगवान् और उनकी नित्य विभूतियाँ अवतरित होती हैं और उनको मनाने से प्रचुर पुण्य का समुदय होने के साथ ही पापमूलक विध्नों किम्वा नकारात्मक ऊर्जा का संक्षय होता है। इसलिए हनुमज्जयन्ती नाम शास्त्रप्रमाणानुमोदित ही है।


”जयं पुण्यं च कुरुते जयन्तीमिति तां विदुः” –स्कन्दमहापुराण, तिथ्यादितत्त्व


जैसे कृष्णजन्माष्टमी में रोहिणी नक्षत्र का योग होने से उसकी महत्ता मात्र रोहिणी विरहित अष्टमी से बढ़ जाती है। और उसकी संज्ञा जयन्ती हो जाती है। ठीक वैसे ही कार्तिक मास में कृष्णपक्ष की चतुर्दशी से स्वाती नक्षत्र तथा चैत्र मास में पूर्णिमा से चित्रा नक्षत्र का योग होने से कल्पभेदेन हनुमान जन्मोत्सव की संज्ञा ” हनुमान जयन्ती” होने में क्या सन्देह है ??


एकादशरुद्रस्वरूप भगवान् शिव ही हनुमान् जी महाराज के रूप में भगवान् विष्णु की सहायता के लिए चैत्रमास की चित्रा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा को अवतीर्ण हुए हैं।


” यो वै चैकादशो रुद्रो हनुमान् स महाकपिः। 

अवतीर्ण: सहायार्थं विष्णोरमिततेजस: ॥"

–स्कन्दमहापुराण,माहेश्वर खण्डान्तर्गत, केदारखण्ड-८/१००


पूर्णिमाख्ये तिथौ पुण्ये चित्रानक्षत्रसंयुते ॥


चैत्र में हनुमान जयन्ती मनाने की विशेष परम्परा भारत में प्रचलित है और कृष्णजन्माष्टमी में रोहिणी नक्षत्र का योग होने से उसकी महत्ता है। 


जन्माष्टमी के उपाय

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तंत्र शास्त्र के अनुसार किसी भी सिद्धि या मनोकामना को पूरा करने के लिए चार रात्रियां सर्वश्रेष्ठ मानी गई है। इनमें पहली कालरात्रि है, जिसे नरक चतुर्दशी या दीपावली भी कहा जाता है। दूसरी अहोरात्रि या शिवरात्रि है। तीसरी दारुणरात्रि या होली है। चौथी मोहरात्रि या जन्माष्टमी है।


शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणी माँ लक्ष्मी का अवतार थी अत: अगर इस दिन भगवान श्रीकृष्ण को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय किए जाएं तो माता लक्ष्मी भी प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यदि आप जन्माष्टमी के दिन ये उपाय पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास से करेंगे तो आपको अभीष्ट फल की प्राप्ति होगी।


1👉🏻 यदि आपकी आमदनी में कोई वृद्धि नही हो रही हो और नौकरी में प्रमोशन भी नहीं हो रहा हो तो जन्माष्टमी के दिन सात कन्याओं को घर बुलाकर खीर खिलाएं। यह काम पांच शुक्रवार तक लगातार करें।


2👉🏻 आर्थिक संकट के निवारण और धन लाभ के लिए जन्माष्टमी के दिन प्रात: स्नान आदि करने के बाद किसी भी राधा-कृष्ण मंदिर में जाकर प्रभु श्रीकृष्ण जी को पीले फूलों की माला अर्पण करें। इससे आर्थिक संकट दूर होने लगते है और धन लाभ के योग प्रबल बनते है ।


3👉🏻 जन्माष्टमी के दिन प्रात: दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक करें । इसके बाद यह उपाय हर शुक्रवार को करें । इस उपाय को करने वाले जातक से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं। इस उपाय को करने से समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।


4👉🏻 जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को सफेद मिठाई, साबुतदाने अथवा चावल की खीर यथाशक्ति मेवे डालकर बनाकर उसका भोग लगाएं उसमें चीनी की जगह मिश्री डाले , एवं तुलसी के पत्ते भी अवश्य डालें। इससे भगवान श्री कृष्ण की कृपा से ऐश्वर्य प्राप्ति के योग बनते है।


5👉🏻 भगवान श्रीकृष्ण को पीतांबर धारी भी कहलाते हैं, पीतांबर धारी का अर्थ है जो पीले रंग के वस्त्र पहनने धारण करता हो। इसलिए श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन किसी मंदिर में भगवान के पीले रंग के कपड़े, पीले फल, पीला अनाज व पीली मिठाई दान करने से भगवान श्रीकृष्ण व माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न रहते हैं, उस जातक को जीवन में धन और यश की कोई भी कमी नहीं रहती है ।


6👉🏻 जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण जी के मंदिर में जटा वाला नारियल और कम से कम 11 बादाम चढ़ाएं । ऐसी मान्यता है कि जो जातक जन्माष्टमी से शुरूआत करके कृष्ण मंदिर में लगातार सत्ताइस दिन तक जटा वाला नारियल और बादाम चढ़ाता है उसके सभी कार्य सिद्ध होते है, उसको जीवन में किसी भी चीज़ का आभाव नहीं रहता है।


7👉🏻 जन्माष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण को पान का पत्ता अर्पित करें फिर उसके बाद उस पत्ते पर रोली से श्री मंत्र लिखकर उसे अपनी तिजोरी में रख लें। इस उपाय से लगातार धन का आगमन होता रहता है ।


8👉🏻 जन्माष्टमी की रात को 12 बजे भगवान श्री कृष्ण का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से जीवन में स्थाई रूप से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है ।


9👉🏻 अपने जीवन में सभी तरह की सुख समृद्धि प्राप्त करने के लिए जन्माष्टमी के दिन पीले चंदन, केसर, गुलाबजल मिलाकर माथे पर टीका-बिंदी लगाएं। यह काम हर गुरुवार को करें।


10👉🏻 अगर क़र्ज़ के बोझ तले दबे हुए हो तो श्मशान के कुएं का जल लाकर पीपल के वृक्ष पर जन्माष्टमी से लेकर नियमित रूप से छह शनिवार तक चढ़ाएं।


11👉🏻 लक्ष्मी कृपा पाने के लिए जन्माष्टमी पर कहीं केले के दो पौधे लगा दें। बाद में उनकी नियमति देखभाल करते रहें। जब पौधे फल देने लगे तो इनका दान करें, स्वयं न खाएं।


12👉🏻 जन्माष्टमी के दिन कृष्ण मंदिर जाकर तुलसी की माला से नीचे लिखे मन्त्र की 11 माला जाप करें। इस उपाय से आपकी हर समस्या का समाधान हो सकता है। मंत्र- क्लीं कृष्णाय वासुदेवाय हरी: परमात्मने प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः


13👉🏻 जन्माष्टमी को शाम के समय तुलसी को गाय के घी का दीपक लगाएं और ॐ वासुदेवाय नमः मंत्र बोलते हुए तुलसी की 11 परिक्रमा करे।

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