स्वधा और स्वाहा में क्या अंतर है? 🤔 99% लोग यह भूल कर बैठते हैं, जानिए सही विधान
आज एक बहुत बड़ा भ्रम दूर करते हैं। अधिकांश लोग यह मान बैठते हैं कि स्वधा और स्वाहा एक ही हैं। कोई मंत्र में स्वाहा बोल देता है तो कोई श्राद्ध में। किंतु स्मरण रखें, ये दोनों भिन्न देवी स्वरूप हैं और इनके कार्य भी सर्वथा भिन्न हैं। यदि आपने इनका स्थान बदल दिया तो आपके अनुष्ठान का फल सही स्थान पर नहीं पहुंचता।
सरल शब्दों में समझें:
· स्वाहा देवी: यह अग्निदेव की शक्ति हैं। जब आप हवन कुंड में आहुति डालते हुए "स्वाहा" का उच्चारण करते हैं, तो यही देवी उस सामग्री को ग्रहण कर सीधे देवताओं तक पहुंचाती हैं। इनका मार्ग ऊर्ध्वगामी है, स्वर्ग की ओर है।
· स्वधा देवी: यह पितरों की अधिष्ठात्री देवी हैं। जब आप तर्पण या पिंडदान में "स्वधा" का उच्चारण करते हैं, तो यही देवी उस अन्न और जल को पितृलोक में स्थित आपके पूर्वजों तक पहुंचाती हैं। इनका मार्ग दक्षिण दिशा की ओर है।
एक सूत्र अवश्य स्मरण रखें:
🔥 हवन में बोलें — स्वाहा।
🪔 श्राद्ध में बोलें — स्वधा।
यदि आपने श्राद्ध के मंत्र में स्वाहा का प्रयोग कर दिया तो आपका अर्पण देवताओं को चला जाएगा। पितरों तक भोजन तभी पहुंचता है जब स्वधा देवी उसे ग्रहण करें। अतः श्राद्ध कर्म में "पितृभ्यः स्वधा नमः" का ही उच्चारण करें।
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