Thursday, April 2, 2026

हनुमानजीको विवाह करनेकी जरूरत क्यों पड़ी ?

हनुमानजीको विवाह करनेकी जरूरत क्यों पड़ी ?

हनुमान जी को 'पराशर संहिता' के अनुसार, सूर्यदेव से 'नौ दिव्य विद्याओं' का ज्ञान प्राप्त करने के लिए विवाह करना पड़ा था। इनमें से चार विद्याओं को सीखने के लिए विवाहित होना अनिवार्य शर्त थी। अपने ब्रह्मचर्य को बचाते हुए, उन्होंने सूर्यपुत्री सुवर्चला से विवाह किया, जो विवाह के बाद तपस्या में लीन हो गईं।विवाह के पीछे के मुख्य कारण:ज्ञान की पूर्णता: हनुमान जी जब सूर्यदेव के पास शिक्षा लेने गए, तो उन्हें सभी 9 विद्याओं का ज्ञान चाहिए था, लेकिन अंतिम 4 विद्याएं अविवाहितों को नहीं दी जा सकती थीं।अनिवार्य शर्त: सूर्यदेव ने उन्हें बताया कि ये विद्याएं केवल एक विवाहित शिष्य को ही दी जा सकती हैं।कठिन परिस्थिति: हनुमान जी की ज्ञान प्राप्ति में कोई बाधा न आए, इसलिए सूर्यदेव के प्रस्ताव पर उन्होंने अपनी तपस्विनी पुत्री सुवर्चला से विवाह किया।ब्रह्मचर्य की रक्षा: यह विवाह केवल एक औपचारिकता (धर्म विवाह) था, न कि सांसारिक बंधन। सुवर्चला विवाह के बाद पुनः तपस्या में चली गईं, जिससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य भंग नहीं हुआ।

आंध्र प्रदेश के खम्मम जिले में हनुमान जी का अपनी पत्नी सुवर्चला के साथ एक अद्वितीय मंदिर भी स्थित है।

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