प्रश्न : -
*राजा दशरथ को सीता स्वयंवर में क्यों नहीं आमंत्रित किया गया था ?*
जवाब : -
दादा ..! ईसके पीछे ऐक कहानी है । एक बार जनकपुर में राजा जनक अपने हरे भरे बगीचे में कुछ नाच - गाना सुन रहे थे वहॉं एक साधु आया ओर बोला की.. जनक जी हमें बहुत भूख लगी है कुछ खाना दो राजा जनक के कानो तक साधु की आवाज नही पहुची ओर साधु ने श्राप दे दिया की तुम्हारा ये ऊध्धन सूक जायेगा । राजा जनक ने माफी मॉंगी ओर कहा हमें माफ़ कर दो। मेरा बगीचा हरा 🍏🌳 भरा कर दो। साधु ने कहा कोई पतिव्रता नारी अगर कच्चे मीट्टी के घडे से कच्ची धागे वाली रस्सी से कूवे में से पानी नीकालकर सिंच दे तो बगीचा फिर से हरा हो जायेगा। राजा जनक ने अपनी पूरी नगरी में संदेश भेजवाया की कोई भी पतिव्रता नारी अगर पानी सिंच दे तो बगीचा हरा 🌳🍏 हो जाये। लेकिन सभी नारी यों को डर था कि... कच्ची मिट्टी के घडे से पानी कैसे नीकल सके? फिर रस्सी भी कच्ची कोई भी स्री ये कार्य नही की।
राजा दशरथ जी को रानी कौशल्या के लिये न्यौता दीया। तो रानी की दासी बोली ईतनी छोटी बात के लिए आप क्यों कष्ट ऊठा ये ❓ मै जा के जनक पूर में बगीचे मे पानी सींच दूर। दासी ने ये काम कर दिया। राजा जनक को लगा की जब स्वयं रानी कौशल्या को बुलाया तो दशरथ जी ने दासी को भेजा. अगर स्वयंवर में आमंत्रित करूँगा तो ❓ किसी दास को अगर भेजा तो तकलीफ हो जायेगी यही सोचकर राजा दशरथ को आमंत्रित नहीं किया..
🙏🏼
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