आरती लेनेके बाद हाथ
क्यों धोना पड़ता हे ?
आरती मूल संस्कृत धातु 'आर्त'
से बना हे। आर्त का अर्थ होता हे, दुखी या संकट ग्रस्त।
भगवानके उपर जो संकट आते हे तो उसके खास अंतरंग भक्त वो संकट अपने ऊपर लेने को तैयार हो जाते हे। आरती को सात बार घुमाया जाता हे। पैरसे लेकर घुटनों तक दो बार, घुटनों से लेकर पेट तक एक बार ओर पेट लेकर मुख तक चार बार। आरती को बहुत धीमी गतिसे घुमाया जाता हे क्योंकि दुख आता हे तुरंत मगर जाता हे धीमी गति से।
इस तरह आरती की ज्योतके द्वारा भगवान का संकट पकड़ लिया जाता हे। अब हाथ धोए बिना यदि हम आरती पर हाथ फिराकर अपने सिर पर हाथ फ़िरादे तो वो संकट हम पर आ सकता हे। इस लिए हाथ धोना आवश्यक हे।
फुल को आरती पर घुमाके भगवानको चढ़ाना ये आरती के साथ भगवानकी प्रदक्षिणा के रूपमें हे।
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