"एक कल्प में क्या-क्या होता है?
वैदिक कालगणना, पुराणिक सृष्टिचक्र एवं ब्रह्मा के दिवस का शास्त्रीय अध्ययन"
✓•सारांश:
भारतीय कालदर्शन विश्व की सबसे विशाल और सूक्ष्म कालगणना प्रणालियों में से एक है। वेद, पुराण, सूर्यसिद्धान्त, मनुस्मृति तथा महाभारत में समय को केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं माना गया, बल्कि ब्रह्माण्डीय स्तर पर मापा गया है। इस कालगणना में कल्प एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण इकाई है। पुराणों के अनुसार एक कल्प ब्रह्मा का एक दिन (दिवस) है, जिसमें सृष्टि की उत्पत्ति, विकास, मन्वन्तर-परिवर्तन, अवतारों का प्रादुर्भाव तथा विविध ब्रह्माण्डीय घटनाएँ घटित होती हैं।
इस शोधप्रबंध में कल्प की परिभाषा, उसकी अवधि, एक कल्प के भीतर घटित होने वाली घटनाएँ तथा उसका दार्शनिक अर्थ विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
✓•१. कल्प शब्द की व्युत्पत्ति:
व्याकरणिक सिद्धि
धातु—
कल्प् व्यवहारे, विधौ, सामर्थ्ये
से "घञ्" प्रत्यय होने पर
कल्पः
शब्द बनता है।
निरुक्तीय अर्थ
येन सृष्टिव्यवस्था कल्प्यते स कल्पः।
अर्थात्—
जिसमें सृष्टि की व्यवस्था सम्पन्न होती है, वह कल्प कहलाता है।
✓•२. कल्प की अवधि:
पुराणों के अनुसार—
एक महायुग
युग अवधि
सत्य १७,२८,००० वर्ष
त्रेता १२,९६,००० वर्ष
द्वापर ८,६४,००० वर्ष
कलि ४,३२,००० वर्ष
कुल = ४३,२०,००० वर्ष
एक कल्प
१००० महायुग = १ कल्प
अर्थात्
४,३२,००,००,००० (४.३२ अरब) मानव वर्ष
✓•३. कल्प = ब्रह्मा का एक दिन:
भागवतपुराण और भगवद्गीता कहती हैं—
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो विदुः।
(गीता ८.१७)
अर्थात्—
एक हजार महायुग ब्रह्मा का एक दिन है।
✓•४. कल्प के आरम्भ में क्या होता है?:
कल्प के प्रारम्भ में—
सृष्टि का पुनः प्राकट्य
पूर्व प्रलय के बाद
पंचमहाभूत
लोक
देवता
जीवसमूह
क्रमशः प्रकट होते हैं।
ब्रह्मा का जागरण
पुराणों के अनुसार—
ब्रह्मा की रात्रि समाप्त होने पर
ब्रह्मा जागते हैं।
फिर सृष्टि का क्रम आरम्भ होता है।
✓•५. सर्ग (प्राथमिक सृष्टि):
सृष्टि का प्रथम चरण—
सर्ग
कहलाता है।
इसमें उत्पन्न होते हैं
महत्तत्त्व
अहंकार
तन्मात्राएँ
पंचमहाभूत
यह सांख्य दर्शन की सृष्टि प्रक्रिया से मेल खाता है।
✓•६. विसर्ग (द्वितीयक सृष्टि):
ब्रह्मा द्वारा की गई सृष्टि
विसर्ग
कहलाती है।
इसमें उत्पन्न होते हैं
देवता
असुर
मनुष्य
पशु
पक्षी
वनस्पति
✓•७. चौदह मन्वन्तर:
एक कल्प का सबसे महत्त्वपूर्ण विभाजन है—
१४ मन्वन्तर
मन्वन्तर
मनु + अन्तर
अर्थात्—
एक मनु का शासनकाल।
✓•८. एक कल्प में १४ मनु:
क्रमशः—
१. स्वायम्भुव २. स्वारोचिष ३. उत्तम ४. तामस ५. रैवत ६. चाक्षुष ७. वैवस्वत (वर्तमान) ८. सावर्णि ९. दक्ष-सावर्णि १०. ब्रह्म-सावर्णि ११. धर्म-सावर्णि १२. रुद्र-सावर्णि १३. देव-सावर्णि १४. इन्द्र-सावर्णि
✓•९. प्रत्येक मन्वन्तर में क्या होता है?:
हर मन्वन्तर में—
एक मनु
मानवजाति का अधिपति।
एक इन्द्र
देवताओं का राजा।
सप्तर्षि
ज्ञानपरम्परा के वाहक।
देवगण
विशिष्ट देवसमूह।
✓•१०. अवतारों का प्रादुर्भाव:
एक कल्प में अनेक अवतार प्रकट होते हैं।
उदाहरण—
मत्स्य
कूर्म
वराह
नरसिंह
वामन
राम
कृष्ण
कल्कि
✓•११. वर्तमान स्थिति:
पुराणों के अनुसार हम—
श्वेतवाराह कल्प
में स्थित हैं।
वर्तमान मन्वन्तर
सप्तम वैवस्वत मन्वन्तर
वर्तमान युग
कलियुग
✓•१२. सप्तर्षि परिवर्तन:
प्रत्येक मन्वन्तर में
सप्तर्षि बदलते हैं।
उद्देश्य
ज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना।
✓•१३. देवासुर संघर्ष:
लगभग प्रत्येक मन्वन्तर में—
देवता
असुर
के मध्य संघर्ष का वर्णन मिलता है।
दार्शनिक अर्थ
सत्य और असत्य का शाश्वत संघर्ष।
✓•१४. मानव सभ्यताओं का उत्थान-पतन:
पुराणों के अनुसार
एक कल्प में—
अनेक राजवंश
अनेक संस्कृतियाँ
अनेक भूगोलिक परिवर्तन
घटित होते हैं।
✓•१५. भूगोल का परिवर्तन:
विष्णुपुराण एवं भागवत में संकेत है कि—
द्वीप
समुद्र
पर्वत
समय-समय पर परिवर्तित होते हैं।
✓•१६. युगचक्र:
प्रत्येक महायुग में
सत्य
↓
त्रेता
↓
द्वापर
↓
कलि
↓
पुनः सत्य
यह क्रम चलता रहता है।
✓•१७. कल्प के अन्त में क्या होता है?:
जब १००० महायुग पूर्ण हो जाते हैं—
नैमित्तिक प्रलय
घटित होता है।
इसमें
भूर्
भुवः
स्वः
लोकों का लय होता है।
ब्रह्मा की रात्रि
प्रारम्भ होती है।
✓•१८. ब्रह्मा की रात्रि:
ब्रह्मा की रात्रि भी
४.३२ अरब वर्ष
की होती है।
इस अवधि में सृष्टि सुप्त रहती है।
✓•१९. अगले कल्प का प्रारम्भ:
रात्रि समाप्त होने पर
नई सृष्टि आरम्भ होती है।
नया कल्प प्रारम्भ होता है।
✓•२०. ब्रह्मा का जीवन:
इकाई अवधि
१ कल्प ४.३२ अरब वर्ष
१ दिन + रात्रि ८.६४ अरब वर्ष
१ वर्ष ३६० ब्रह्म दिवस
१०० ब्रह्म वर्ष ब्रह्मा की आयु
✓•२१. दार्शनिक अर्थ:
कल्प का सिद्धान्त यह बताता है—
ब्रह्माण्ड का कोई स्थायी आरम्भ या अन्त नहीं।
सृष्टि चक्रीय है
सृष्टि
→ स्थिति
→ प्रलय
→ पुनः सृष्टि
✓•२२. वेदान्त दृष्टि:
उपनिषद् कहते हैं—
ब्रह्म सत्य है।
सृष्टि का उत्पन्न होना और लय होना
माया के स्तर पर है।
✓•२३. कल्प और आधुनिक विज्ञान:
कुछ विद्वान कल्प की तुलना—
Cosmic Cycles
Oscillating Universe
Cyclic Cosmology
से करते हैं।
किन्तु यह केवल दार्शनिक तुलना है, प्रत्यक्ष वैज्ञानिक समरूपता नहीं।
✓•निष्कर्ष:
एक कल्प केवल समय की इकाई नहीं, बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि-चक्र का नाम है। एक कल्प में सृष्टि का उद्भव, चौदह मन्वन्तरों का क्रम, विभिन्न मनुओं का शासन, सप्तर्षियों का परिवर्तन, अवतारों का प्रादुर्भाव, युगचक्रों का संचालन तथा असंख्य जीवों की कर्मयात्रा सम्पन्न होती है। कल्प के अन्त में नैमित्तिक प्रलय होता है और ब्रह्मा की रात्रि प्रारम्भ होती है।
इस प्रकार भारतीय कालदर्शन का निष्कर्ष है—
“एक कल्प ब्रह्माण्ड की एक श्वास है; सृष्टि उसका उच्छ्वास है और प्रलय उसका निःश्वास।”
और यही कारण है कि पुराणों में कल्प को केवल कालगणना नहीं, बल्कि सृष्टि, धर्म, कर्म और चेतना के महाचक्र के रूप में देखा गया है।
#त्रिस्कन्धज्योतिर्विद्
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