Friday, July 13, 2012

अन्य धर्मोँ मेँ जाति संप्रदाय

ऐसा माना जाता है कि जाति व्यवस्था केबल हिन्दुओँ मेँ पायी जाती है ।हिन्दुओँ मेँ जाति गोत्र बनाया ताकि लोग ब्लड रीलेशन मेँ शादी करने से बच जाये ।दुसरा कारण था लोगोँ को आइडेँटी देने का ताकि परिचय के तौर पर अपना नाम बोलेँ तो कार्य और क्षेत्र भी मालुम चल जाये ।भेदभाब,छुआछुत .जाति ,संप्रदाय हर प्रमुख धर्मोँ मेँ मिलता है लेकिन अन्य धर्मोँ मेँ कोइ वैग्यानिक या लॉजिक नहिँ दिखता।अन्य धर्मोँ मेँ लोग आस्थाओँ के आधार पर विभाजित हैँ ।जबकि हिन्दु धर्म अनेक जातियोँ मेँ विभाजित होने पर भी सभी आस्थाओँ को समान तौर पर मानते हैँ ।

#क्रिश्चन मेँ बहुत सारे छोटे बडे चर्च होते हैँ जो मुख्यतः 7 संप्रदायोँ मेँ विभक्त हैँ और ये 7 संप्रदायोँ फिर से कई उपसंप्रदायोँ मेँ विभक्त होते हैँ । यहाँ छोटे चर्च मेँ जाने बालौँ को बडे चर्च मेँ जाने कि मनाहि होती है और सबकी पुजा पद्धति मान्यताओँ मेँ अंतर पाया जाता है । मान्यताओँ का तुलनात्मक अध्ययन
  • Baptist
  • Churches of Christ
  • Anabaptist
  • Orthodox
  • Presbyterian
  • Anglican
  • Lutheran
  • Congregational
  • Adventist
  • Pentecostal
  • Roman Catholic
  • Methodist
 #मुस्लिमोँ मेँ जाति व्यबस्था जो प्रमुखतः अशरफ ,अजलफ ,अरजल जातिओँ मेँ बंटा है जिसकी अनेक उपजातियां हैँ।शिया ,सुन्नी,अहमदिया जैसे 73 संप्रदाय भी हैँ ।ये जाति या संप्रदाय केबल अपनी जातियोँ या संप्रदायोँ मेँ हि रिशता करते हैँ और धार्मिक मान्यताओँ मेँ भी अंतर पाया जाता है और ये लोग एक दुसरे को काफिर ठहराते फिरतेँ हैँ ।
''जाति प्रथा को लीजिए। इस्लाम भ्रातृ-भाव की बात कहता है। हर व्यक्ति यही अनुमान लगाता है कि इस्लाम दास प्रथा और जाति प्रथा से मुक्त होगा। गुलामी के बारे में तो कहने की आवश्यकता ही नहीं। अब कानून यह समाप्त हो चुकी है। परन्तु जब यह विद्यमान थी, तो ज्यादातर समर्थन इसे इस्लाम और इस्लामी देशों से ही मिलता था। कुरानमें पैंगबर ने गुलामों के साथ उचित इस्लाम में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इस अभिषाप के उन्मूलन के समर्थन में हो।जैसा कि सर डब्ल्यू. म्यूर ने स्पष्ट कहा है- ''....गुलाम या दासप्रथा समाप्त हो जाने में मुसलमानों का कोई हाथ नहीं है, क्योंकि जब इस प्रथा के बंधन ढीले करने का अवसर था, तब मुसलमानों ने उसको मजबूती से पकड़ लिया..... किसी मुसलमान पर यह दायित्व नहीं है कि वह अपने गुलामों को मुक्त कर दें.....'' ''परन्तु गुलामी भले विदा हो गई हो, जाति तो मुसलमानों में क़ायम है। उदाहरण के लिए बंगाल के मुसलमानों की स्थिति को लिया जा सकता है। १९०१ के लिए बंगाल प्रांत के जनगणना अधीक्षक ने बंगाल के मुसलमानों के बारे में यह रोचक तथ्य दर्ज किए हैं : ''मुसलमानों का चार वर्गों-शेख, सैयद, मुग़ल और पठान-में परम्परागत विभाजन इस पांत (बंगाल) में प्रायः लागू नहीं है। मुसलमान दो मुखय सामाजिक विभाग मानते हैं-१. अशरफ अथवा शरु और २. अज़लफ।
अशरफ से तात्पर्य है 'कुलीन',और इसमें विदेशियों के वंशज तथा ऊँचीजाति के अधर्मांतरित हिन्दू शामिल हैं। शेष अन्य मुसलमान जिनमें व्यावसायिक वर्ग और निचली जातियों के धर्मांतरित शामिल हैं, उन्हें अज़लफ अर्थात् नीचा अथवा निकृष्ट व्यक्ति माना जाता है। उन्हें कमीना अथवा इतर कमीन या रासिल, जो रिजाल का भ्रष्ट रूप है, 'बेकार' कहा जाता है। कुछ स्थानों पर एक तीसरा वर्ग 'अरज़ल' भी है, जिसमें आने वाले व्यक्ति सबसे नीच समझे जाते हैं। उनके साथ कोई भी अन्य मुसलमान मिलेगा-जुलेगा नहीं और न उन्हें मस्जिद और सार्वजनिक कब्रिस्तानों में प्रवेश करने दिया जाता है। इन वर्गों में भी हिन्दुओं में प्रचलित जैसी सामाजिक वरीयताऔर जातियां हैं।
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१. 'अशरफ' अथवा उच्च वर्ग के मुसलमान (प) सैयद, (पप) शेख, (पपप) पठान, (पअ) मुगल, (अ) मलिक और (अप)मिर्ज़ा।
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२. 'अज़लफ' अथवा निम्न वर्ग के मुसलमान (i) खेती करने वाले शेख और अन्य वे लोग जो मूलतः हिन्दू थे, किन्तु किसी बुद्धिजीवी वर्ग से सम्बन्धित नहीं हैं और जिन्हें अशरफ समुदाय, अर्थात् पिराली और ठकराई आदिमें प्रवेश नहीं मिला है। ( ii) दर्जी, जुलाहा, फकीर और रंगरेज। (iii) बाढ़ी, भटियारा, चिक, चूड़ीहार, दाई, धावा, धुनिया, गड्डी, कलाल, कसाई, कुला, कुंजरा, लहेरी, माहीफरोश, मल्लाह, नालिया, निकारी। (iv) अब्दाल, बाको, बेडिया, भाट, चंबा, डफाली, धोबी, हज्जाम, मुचो, नगारची, नट, पनवाड़िया, मदारिया, तुन्तिया।
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३. 'अरजल' अथवा निकृष्ट वर्ग भ ानार, हलालखोदर, हिजड़ा, कसंबी, लालबेगी, मोगता, मेहतर।
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जनगणना अधीक्षक ने मुस्लिम सामाजिक व्यवस्था के एक और पक्ष का भी उल्लेख किया है। वह है 'पंचायत प्रणाली' का प्रचलन। वह बताते हैं : ''पंचायत का प्राधिकार सामाजिक तथा व्यापार सम्बन्धी मामलों तक व्याप्त है और........अन्य समुदायों के लोगों से विवाह एक ऐसा अपराध है, जिस पर शासी निकायकार्यवाही करता है। परिणामत: ये वर्ग भी हिन्दू जातियों के समान ही प्रायः कठोर संगोती हैं, अंतर-विवाह पर रोक ऊंची जातियों से लेकर नीची जातियों तक लागू है। उदाहरणतः कोई घूमा अपनी ही जाति अर्थात् घूमा में ही विवाह कर सकता है। यदि इस नियम की अवहेलना की जाती है तो ऐसा करने वाले को तत्काल पंचायत के समक्ष पेश किया जाता है। एक जाति का कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी दूसरी जाति में प्रवेश नहीं ले पाता और उसे अपनी उसी जाति का नाम कायम रखना पड़ता है, जिसमें उसने जन्म लिया है। यदि वह अपना लेता है, तब भी उसे उसी समुदाय का माना जाता है, जिसमें कि उसने जन्म लिया था..... हजारों जुलाहे कसाई का धंधा अपना चुके हैं, किन्तु वे अब भी जुलाहे ही कहे जाते हैं।'' इसी तरह के तथ्य अन्यभारतीय प्रान्तों के बारे में भी वहाँ की जनगणना रिपोर्टों से वे लोग एकत्रित कर सकते हैं, जो उनका उल्लेख करना चाहते हों। परन्तु बंगाल के तयिही यह दर्शाने के लिए पर्याप्त हैं कि मुसलमानों में जाति प्रथा ही नहीं, छुआछूत भी प्रचलित है।''
Among Muslims, Shia and Sunni kill each other in all the Muslim countries. The
religious riot in Muslim countries is always between these two. The Shia will
not go to Sunni mosque, these two will not go to Ahamadiya mosque, these three
will not go to Sufi mosque, these four will not go to Mujahiddin mosque….like
this it appears there are many castes in among Muslims, Killing /
bombing/conquering/ massacring/… each other ! The American attack to the Muslim
land of Iraq is fully supported by all the Muslim countries surrounding Iraq !
One Allah, One Quran, One Nebi….! Great unity !
CASTE IN MUSLIM
I. Ashraf or better class Mahomedans.
(1) Saiads.
(2) Sheikhs.
(3) Pathans.
(4) Moghul.
(5) Mallik.
(6) Mirza. II. Ajlaf or lower class Mahomedans.
(1) Cultivating Sheikhs, and others who were originally Hindus but who do not belong to any functional group, and have not gained admittance to the Ashraf Community, e.g. Pirali and Thakrai.
(2) Darzi, Jolaha, Fakir, and Rangrez.
(3) Barhi, Bhalhiara, Chik, Churihar,Dai, Dhawa, Dhunia, Gaddi, Kalal, Kasai, Kula Kunjara, Laheri, Mahifarosh, Mallah, Naliya, Nikari.
(4) Abdal, Bako, Bediya, Bhal, Chamba, Dafali, Dhobi, Hajjam, Mucho, Nagarchi, Nal,Panwaria, Madaria, Tunlia. III. Arzal or degraded class.
Bhanar, Halalkhor, Hijra, Kasbi, Lalbegi, Maugta, Mehtar."
 

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